रेल के डिब्बे में दिखा एक romantic couple (मेरी डायरी से)

साहित्य से अभी ठीक तरह से मेरा वास्ता नहीं पड़ा है सो "प्रेम" रूपी भाव का चित्रण फिल्मो में ही देखा है....
मै फिल्मी प्यार को बकवास और बेवकूफी की इन्तहां मनाता हूँ.... और अब तो हमारी फिल्मो का हीरो SEX शब्द के निकट और LUV से दूर है..... LOVE से तो उसका वास्ता भी नहीं है. 
और पता नहीं क्यों मुझे आज तक जो भी couple मिले है वो "निःस्वार्थ प्रेम" में नहीं थे. पर इसके इतर एक जोड़ा दिखा है जिसके बारे में लिख रहा हूँ.

रात के 1 बजकर 27 मिनट पर हरदोई रेलवे स्टेशन पर जैसे ही लखनऊ जाने वाली ट्रेन आई मै आगे की तरफ लगे general डिब्बो में से पहले डिब्बे के साथ भागने लगा. उस पहले डिब्बे में भीड़ कम थी पर इतनी भी कम नहीं थी की मुझे बैठने को जगह मिल जाती. और हुआ भी वाही मुझे खड़े-खड़े हरदोई से लखनऊ का 2 घंटे का सफ़र करना पड़ा. पर उस 2 घंटे के सफ़र में मै पता नहीं क्यों उस डिब्बे के बीच की सीटों के पास जमीन में बैठे एक जोड़े पर मेरा ध्यान गया. करीब 20 सेकंड में ही मुझे पता चल गया था की वे या तो बॉय फ्रैंड-गर्ल फ्रैंड है या ऐसे पति-पत्नी जिनकी शादी साल भर से जादा पुरानी नहीं होगी. वो दोनों उस general डिब्बे की फ़र्स पर बैठे-बैठे सो रहे थे. वे किसी प्रकार की गलत स्थिति में नही थे पर फिर भी...........

मैंने उसके बाद उस डिब्बे के अन्य couples की ओर ध्यान दिया. सभी हिन्दू थे....... मतलब महिलाये साडी और मंगल सूत्र धारण किये हुयी थी. कोई भी उस रेल के डिब्बे की फ़र्स पर नही बैठा था. सभी के साथ एक बच्चा अनिवार्य रूप से था. और वे बस एक ही भाव में थे की जल्दी स्टेशन आये और वो इस रात की रेल यात्रा से मुक्ति पाए.

पर ऐसा नही था कि उस फ़र्स पर बैठे couple को कोई समस्या नहीं थी पर वो समस्याए उन पर हावी नहीं हो रही थी. कुछ देर के लिए जब उनके पड़ोस की सीट पर बैठा व्यक्ति जब टॉयलेट गया तो वो लड़का उसकी जगह पर बैठ गया जबकि लड़की निचे फ़र्स पर ही बैठी रही. फिर वो लड़की उस लड़के के पैर भी दबाने लगी.... पर तभी न जाने क्या हुआ कि वो लड़की उस लड़के की गर्दन दबाने की धमकी देती हुई उस लड़के की गर्दन तक पहुच गयी. शायद इसी तरह के बच्चो जैसे व्यवहार की वजह से वो उस डिब्बे के बाकि लोगो जितने परेशान नही दिख रहे थे.

अगर वे शादी शुदा थे तो उस लड़की के पहनावे के आधार पर वे मुस्लिम रहे होगे और अगर वे gf-bf रहे होगे तो निकट भविष्य में वे honor killing के शिकार होगे इसकी सम्भावनाये प्रबल है. पर वे उस डिब्बे के अन्य जोड़ो की तरह साथ होकर भी अलग-अलग नहीं थे.............

पता नहीं क्यों science fiction नहीं लगाती है Iron Man 3

(निवेदन - अगर आप ने Iron Man 1, 2 और The Avengers नामक फिल्मे नहीं देखी है तो Iron Man 3 आप के देखने लायक नहीं है और नीचे जो भी लिखा है वो भी आप के लिए नहीं है)          
Iron Man................. 
एक ऐसा सुपर हीरो जो मुझे इस सीरिज की पहली फिल्म में झकझोर कर कहता है की बेटा देख सुपर हीरो वो भी हो सकता है जो तेरी मेज पर रखी फिजिक्स और केमिस्ट्री की किताबों का एक-एक शब्द जानता है..... जो तुझे पकाऊ लगने वाली मोटी स्टेटिक्स की किताब के हर सवाल को हल कर सकता है.......
तो अब जब इस Iron Man सीरिज की तीसरी या शायद चोथी फिल्म आ चुकी है तो इसी के बारे में कुछ टाइप करता हूँ........
फिल्म की बाते तो होती रहेगी पर एक ख़ास बात थी इस फिल्म में.... "कमल हसन" की "विश्वरूपं" के जैसे कुछ सीन... लगा की कमल जी को sms करके कहू की भाई बधाई हो आप की फिल्म के सीन विदेशी हूबहू चुरा रहे है..
पुरे देश को आप पर गर्व है. 
इस फिल्म में वैसे तो बहुत कुछ है और कुछ भी नहीं है....
मुझे बड़ी उम्मीद थी कि Ben Kingsley इस फिल्म में "जोकर" से भी बड़े सिरफिरे विलेन होगे पर ऐसा हो न सका. अब "अमर उजाला" टाइप में लिख रहा हूँ...... थोडा ध्यान से पढियेगा........

कहानी-
फिल्म की कहानी सुरु होती है एक पार्टी से जिसमे पहली फिल्म वाला और कई भाषा बोलने वाला टोनी का सहायक उससे पहली बार मिला था. पर वो बस एक सीन में ही है. असली कहानी है टोनी की 1999 की उस पार्टी के समय वाली महिला मित्र की जो एक ऐसी दवा विकसित कर रही है जो जन्तुओ और वनस्पतियों के टूटे और काटे हिस्सों को अपने आप सही कर देती है. फिर कई सालो बाद वो और उसका बॉस टोनी को मजबूर करते है उस दवा की कमियों को दूर करने के लिए. पर बीच में ही टोनी की उस भूत पूर्व महिला मित्र का जमीर भी जाग जाता है और फिल्म के अंत में टोनी की छाती पर लगा वो चमकीला और छोटा रिएक्टर भी गायब हो जाता है.

Ben Kingsley, पाकिस्तान और लादेन-
फिल्म में Ben Kingsley बिलकुल उस भारतीय विलेन की तरह है जो पकडे जाने पर कहता था हजूर ये हम ने नहीं किया है और हीरो के पैरो को पकड़ लेता है....... पर इसके बाद देशी विलेन हीरो को चकमा देता है पर Ben Kingsley ऐसा नहीं करते है और बाद में पता चलाता है कि सच में वो विलेन था ही नहीं.

इस फिल्म में पाकिस्तान में लादेन का मिलना और ड्रोन हमले दोनों को आम से भी आम बात माना गया है. अमेरिकी सेना को सेवा देने वाला एक लोहे के सूट को पहनने वाला पाकिस्तान में यू घुसता है जैसे उस के घर की खेती हो. पर पाकिस्तानी भी उससे नहीं डरते है... जबतक वो उन्हें डराता नहीं है. पर विलेन के सहयोगी भी पाकिस्तान में होते है.

लादेन एक कठपुतली था... जिसे किसी ने अपने मुखौटे के रूप में प्रयोग किया था जिससे वो खुद बचा रहे और अपना काम भी निकाल सके....... ऐसा यह फिल्म कहती है और लादेन के अलावा दो और नाम भी गिनाये जाते है.

Science fiction-
यह फिल्म Iron Man के बाद आई Iron Man 2 के बाद आई The Avengers के बाद आई है. पहली दो फिल्मे Science fiction थी पर तीसरी फिल्म क्या थी पता नहीं और शायद इसी लिए Science fiction होने के बावजूद यह फिल्म Science fiction नहीं लगती.

इस बारे में फिल्म में एक जगह The Avengers के "हथोडा मानव" का नाम लेके सफाई भी दी जाती है कि जब पीछली फिल्म "चमत्कारिक" थी तो यह भी क्यों न हो?

क्यों देखे-
गर्मियों की छुट्टियों में बच्चो के साथ सिनेमा घर जाने के लिए. कुछ हवाई करतब देखने के लिए. रा-वन की प्रेरणा देने वाले सुपर हीरो से मिलाने के लिए.

क्यों न देखे-
अगर आप 13 से 28 साल के लोगो के लिए बनाने वाली बेहतरीन फिल्मे देखना पसंद करते है और रा-वन से थोड़ी नहीं काफी बेहतर फिल्म की उम्मीद पाले है.
 

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